भू-माफिया के निजी आयोजन में भाजपा नेताओं की मौजूदगी पर कांग्रेस का हमला, सुरेंद्र वर्मा बोले- “पूरी सरकार बनी पोस्टर बॉय”

रायपुर, 2 सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने एक कथित भू-माफिया के निजी आयोजन में भाजपा के नेताओं, मंत्रियों और विधायकों की मौजूदगी को लेकर राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस के प्रदेश मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने आरोप लगाया कि सत्ता और रसूखदार लोगों के गठजोड़ के कारण संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कथित तौर पर कई शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं हो रही है।

कांग्रेस ने इस पूरे मामले को राजनीतिक और प्रशासनिक संरक्षण से जोड़ते हुए निष्पक्ष जांच और तत्काल कार्रवाई की मांग की है।

निजी आयोजन में नेताओं की मौजूदगी पर कांग्रेस ने उठाए सवाल

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा कि किसी ऐसे व्यक्ति, जिसके खिलाफ जमीन से जुड़े अवैध कारोबार, कब्जे या अवैध प्लाटिंग जैसी शिकायतें होने का दावा किया जा रहा है, उसके निजी आयोजन में सत्ता के शीर्ष पदों पर बैठे लोगों की मौजूदगी गंभीर सवाल खड़े करती है।

उन्होंने आरोप लगाया कि जब किसी कथित अवैध कारोबारी या भू-माफिया से जुड़े आयोजन में मंत्री, विधायक, मुख्यमंत्री अथवा अन्य जनप्रतिनिधि मुख्य अतिथि या प्रचार सामग्री में प्रमुख चेहरे के रूप में नजर आते हैं, तो इससे आम जनता में गलत संदेश जाता है और ऐसे लोगों का मनोबल बढ़ सकता है।

कांग्रेस का कहना है कि राजनीतिक और प्रशासनिक संरक्षण के आरोपों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और किसी भी व्यक्ति को उसके राजनीतिक संपर्क या प्रभाव के आधार पर कार्रवाई से बाहर नहीं रखा जाना चाहिए।

“दर्जनों शिकायतों के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं?”

सुरेंद्र वर्मा ने दावा किया कि संबंधित जमीन कारोबारी के खिलाफ कई शिकायतें सामने आने के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार में भू-माफिया के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई और कानूनी शिकंजा कमजोर पड़ गया है।

कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि जमीन पर कब्जा, अवैध प्लाटिंग अथवा जमीन से जुड़े अन्य मामलों में यदि शिकायतें लंबित हैं तो प्रशासन को राजनीतिक दबाव से मुक्त होकर दस्तावेजों और तथ्यों के आधार पर जांच करनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि संबंधित व्यक्ति के खिलाफ शिकायतों पर अब तक क्या कार्रवाई हुई, किन मामलों में जांच चल रही है और यदि शिकायतें निराधार हैं तो उसकी भी स्थिति सार्वजनिक की जानी चाहिए।

जांच एजेंसियों की भूमिका पर भी कांग्रेस का सवाल

सुरेंद्र वर्मा ने आरोप लगाया कि केंद्र और राज्य की विभिन्न जांच एजेंसियों का इस्तेमाल विपक्ष को दबाने के लिए किया जा रहा है, जबकि सत्ता से जुड़े प्रभावशाली लोगों के मामलों में कार्रवाई नहीं होती।

उन्होंने ईडी, आयकर विभाग, ईओडब्ल्यू, एसीबी और सीबीआई समेत विभिन्न एजेंसियों का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे मामलों में भी समान रूप से जांच होनी चाहिए। कांग्रेस ने संबंधित मामले में राजनीतिक प्रभाव से मुक्त जांच की मांग की है।

“अपने ही सांसदों की सुनवाई नहीं, लेकिन निजी आयोजन में पूरी कैबिनेट”

कांग्रेस प्रवक्ता ने भाजपा सरकार के कामकाज पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रदेश के सांसदों और जनप्रतिनिधियों द्वारा अधिकारियों एवं सरकार को भेजे गए पत्रों पर कथित तौर पर पर्याप्त कार्रवाई नहीं हो रही है।

उन्होंने बृजमोहन अग्रवाल और विजय बघेल के पत्रों का उल्लेख करते हुए दावा किया कि उनके द्वारा उठाए गए कई मुद्दों का सरकार के पास जवाब नहीं है। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि सांसदों, विधायकों और महापौर तक के फोन अधिकारियों द्वारा नहीं उठाए जाते, जबकि एक जमीन कारोबारी के निजी आयोजन में सत्ता पक्ष के कई बड़े नेता पहुंच जाते हैं।

कांग्रेस ने इसी विरोधाभास को लेकर भाजपा संगठन और सरकार पर निशाना साधा है।

“जमीन कारोबारी की चुनौती पर भी कार्रवाई नहीं”

सुरेंद्र वर्मा ने आगे आरोप लगाया कि संबंधित जमीन कारोबारी द्वारा भाजपा के मंत्रियों और विधायकों को सार्वजनिक रूप से चुनौती दिए जाने के बावजूद सरकार और भाजपा संगठन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

उन्होंने इसे भाजपा की कार्यशैली में बदलाव का संकेत बताते हुए कहा कि पार्टी के पुराने कार्यकर्ताओं और जनाधार वाले नेताओं के लिए यह चिंता का विषय है।

कांग्रेस प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि भाजपा में अब पार्टी संविधान और अनुशासन से ऊपर धन और प्रभाव को महत्व दिया जा रहा है।

संवैधानिक पदों पर बैठे नेताओं से दूरी बनाने की अपील

कांग्रेस ने भाजपा और आरएसएस से जुड़े नेताओं तथा संवैधानिक पदों पर बैठे जनप्रतिनिधियों से अपील की कि वे विवादों में घिरे अथवा कथित भू-माफिया से जुड़े निजी आयोजनों से दूरी बनाए रखें।

सुरेंद्र वर्मा ने कहा कि जनप्रतिनिधियों की सार्वजनिक छवि और जनता के बीच उनकी विश्वसनीयता महत्वपूर्ण है। इसलिए किसी विवादित व्यक्ति के निजी कार्यक्रम में उनकी मौजूदगी को लेकर उठने वाले सवालों का जवाब देना भी जरूरी है।

कांग्रेस की प्रमुख मांगें

कांग्रेस ने पूरे मामले में मुख्य रूप से निम्न बिंदुओं पर कार्रवाई की मांग की है—

  • संबंधित व्यक्ति के खिलाफ प्राप्त शिकायतों की निष्पक्ष जांच हो।
  • जमीन से जुड़े कथित कब्जे और अवैध प्लाटिंग की राजस्व एवं प्रशासनिक जांच कराई जाए।
  • शिकायतों पर अब तक हुई कार्रवाई की स्थिति सार्वजनिक की जाए।
  • राजनीतिक या प्रशासनिक दबाव से मुक्त होकर दोष सिद्ध होने पर कानूनी एवं दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
  • सत्ता पक्ष के नेताओं की कथित मौजूदगी और राजनीतिक संरक्षण के आरोपों की भी जांच हो।
  • संवैधानिक पदों पर बैठे जनप्रतिनिधि विवादित निजी आयोजनों से दूरी बनाए रखें।

कांग्रेस के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी

कांग्रेस द्वारा लगाए गए ये आरोप फिलहाल राजनीतिक दल के बयान और दावों पर आधारित हैं। संबंधित भू-माफिया, भाजपा नेताओं अथवा राज्य सरकार की ओर से इस प्रेस विज्ञप्ति के संदर्भ में उनका पक्ष इस सामग्री में उपलब्ध नहीं है। इसलिए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित पक्षों का जवाब सामने आना महत्वपूर्ण होगा।

Bharat36National के लिए निष्कर्ष:
यह मामला केवल एक निजी आयोजन में नेताओं की मौजूदगी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके जरिए कांग्रेस ने प्रदेश में राजनीतिक संरक्षण, भू-माफिया, प्रशासनिक कार्रवाई और सत्ता-संगठन के संबंधों को लेकर व्यापक सवाल खड़े किए हैं। अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि सरकार और भाजपा संगठन इन आरोपों पर क्या स्पष्टीकरण देते हैं और संबंधित जमीन मामलों में प्रशासनिक स्तर पर कोई जांच या कार्रवाई होती है या नहीं।

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