रायपुर, 19 सितंबर 2026। झीरम घाटी हत्याकांड में एनआईए की विशेष अदालत द्वारा 10 दोषियों को मृत्युदंड सुनाए जाने के बाद छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक बार फिर आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष दीपक बैज ने एनआईए अदालत के फैसले को “आधा-अधूरा न्याय” बताते हुए झीरम कांड के कथित व्यापक षड्यंत्र की जांच की मांग की है।
बैज ने कहा कि झीरम घाटी कांड ने कांग्रेस के नेतृत्व की एक पूरी पीढ़ी को खत्म कर दिया था। उनके मुताबिक, इस हमले के लिए जिम्मेदार लोगों को सजा मिलनी चाहिए, लेकिन कांग्रेस का आरोप है कि एनआईए की जांच हमले के पीछे के कथित बड़े षड्यंत्र तक नहीं पहुंच सकी।
“भाजपा नहीं चाहती झीरम का सच सामने आए” — बैज
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने आरोप लगाया कि भाजपा झीरम घाटी का पूरा सच सामने आने से डरती है। उन्होंने कहा कि यदि इस मामले की व्यापक जांच हुई तो कई सवालों के जवाब सामने आ सकते हैं।

बैज ने तत्कालीन भाजपा सरकार पर भी गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि झीरम जैसी बड़ी घटना में सुरक्षा व्यवस्था और घटना से जुड़े सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच जरूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि तत्कालीन सरकार के स्तर पर जांच को प्रभावित करने के प्रयास किए गए।
हालांकि, ये आरोप कांग्रेस की राजनीतिक दलीलें हैं और इन्हें स्थापित न्यायिक तथ्य के रूप में नहीं देखा जा सकता। हालिया एनआईए अदालत के फैसले में दोषसिद्धि आरोपित व्यक्तियों की भूमिका से संबंधित साक्ष्यों के आधार पर हुई है।
एनआईए अदालत ने 10 दोषियों को सुनाई मौत की सजा
झीरम घाटी मामले में जगदलपुर की विशेष एनआईए अदालत ने 16 सितंबर 2026 को 10 दोषियों को मृत्युदंड सुनाया। इससे पहले 5 सितंबर को अदालत ने सभी 10 आरोपियों को दोषी ठहराया था। दोषियों को विभिन्न धाराओं के तहत सजा दी गई है और उन्हें हाईकोर्ट में अपील के लिए 30 दिन का समय दिया गया है।
25 मई 2013 को बस्तर के दरभा क्षेत्र की झीरम घाटी में कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के काफिले पर माओवादी हमला हुआ था। इस हमले में वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं सहित बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई थी। एनआईए और विभिन्न रिपोर्टों में मृतकों की संख्या के आंकड़ों में अंतर दिखाई देता है, जबकि एनआईए के आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर हालिया रिपोर्टों में 27 लोगों की मौत और 35 से अधिक लोगों के घायल होने का उल्लेख किया गया है।
हमले में तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, उनके पुत्र दिनेश पटेल, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल, पूर्व नेता प्रतिपक्ष महेंद्र कर्मा और कांग्रेस नेता उदय मुदलियार सहित कई प्रमुख लोग मारे गए थे।
एसआईटी जांच का मुद्दा फिर उठा
दीपक बैज ने कहा कि कांग्रेस सरकार बनने के बाद झीरम मामले की कथित साजिश की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया था। कांग्रेस का कहना है कि एनआईए और राज्य की एसआईटी के बीच जांच तथा दस्तावेजों को लेकर कानूनी विवाद हुआ।
बैज ने दावा किया कि हाईकोर्ट के स्तर पर राज्य एसआईटी को दस्तावेज उपलब्ध कराने से जुड़े आदेश के बाद मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा और दिसंबर 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने एनआईए की अपील खारिज कर दी। कांग्रेस अब राज्य सरकार से पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार द्वारा गठित एसआईटी के माध्यम से मामले के कथित षड्यंत्र की जांच आगे बढ़ाने की मांग कर रही है।
“सिर्फ हमलावरों तक सीमित न रहे जांच”
बैज का कहना है कि झीरम घाटी जैसा हमला केवल मौके पर मौजूद हमलावरों की कार्रवाई नहीं हो सकता और इसके पीछे की योजना, नेतृत्व तथा कथित साजिश की भी जांच होनी चाहिए।
हालिया अदालत की कार्यवाही में अभियोजन ने बड़ी संख्या में गवाहों और दस्तावेजी साक्ष्यों को पेश किया था। रिपोर्टों के अनुसार, मुकदमे में 11 गिरफ्तार आरोपियों पर सुनवाई हुई, जिनमें से एक की सुनवाई के दौरान मौत हो गई और बाकी 10 को दोषी ठहराया गया।
कांग्रेस ने उठाए सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
दीपक बैज ने यह भी सवाल उठाया कि 2013 की परिवर्तन यात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव क्यों किया गया था और कांग्रेस नेताओं का काफिला इतने संवेदनशील नक्सल प्रभावित क्षेत्र से कैसे गुजरा।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस के लिए झीरम घाटी सिर्फ एक आपराधिक घटना नहीं बल्कि ऐसा घाव है जिसे पार्टी आज भी महसूस करती है। बैज के मुताबिक, पार्टी इस मामले में कथित षड्यंत्र को सामने लाने के लिए कानूनी और राजनीतिक स्तर पर प्रयास जारी रखेगी।
झीरम मामले में आगे क्या?
एनआईए अदालत के फैसले के बाद मामला अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। दोषियों को हाईकोर्ट में अपील का अवसर मिला है। दूसरी ओर, पीड़ित परिवारों और अन्य पक्षों की ओर से भी व्यापक जांच तथा कथित मुख्य साजिशकर्ताओं की भूमिका की जांच की मांग सामने आ रही है।
इस तरह, एनआईए अदालत का फैसला झीरम घाटी मामले में 13 साल पुराने मुकदमे का एक महत्वपूर्ण न्यायिक पड़ाव है, लेकिन इसके साथ ही कथित व्यापक षड्यंत्र, सुरक्षा चूक और अन्य आरोपों को लेकर राजनीतिक बहस भी जारी है।
नोट: इस समाचार में भाजपा और कांग्रेस से जुड़े आरोपों को संबंधित पक्षों के बयानों के रूप में प्रस्तुत किया गया है। इन्हें स्वतंत्र रूप से सिद्ध तथ्य के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। हालिया न्यायिक घटनाक्रम को उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर अपडेट किया गया है।

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