संजीव तिवारी पर कार्रवाई की मांग तेज: हाईकोर्ट पहुंचा मामला, पद से हटाने और CBI जांच की उठी मांग

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भारत36 नेशनल | जगदलपुर/रायपुर

जनसंपर्क विभाग के अपर संचालक संजीव तिवारी के खिलाफ शिकायतों, कथित भ्रष्टाचार और अन्य गंभीर आरोपों को लेकर कार्रवाई की मांग अब तेज होती दिखाई दे रही है। मामला अब छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट तक पहुंच गया है, जहां उन्हें तत्काल प्रभाव से पद से हटाने तथा उनके विरुद्ध प्राप्त शिकायतों की उच्च स्तरीय एवं CBI जांच कराने की मांग की गई है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार जिला बस्तर, जगदलपुर से माननीय मुख्य न्यायाधीश, उच्च न्यायालय छत्तीसगढ़, बिलासपुर को एक ज्ञापन प्रेषित किया गया है। इस ज्ञापन में जनसंपर्क विभाग के अपर संचालक संजीव तिवारी के विरुद्ध विभिन्न शिकायतों एवं कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई है।

PMWA ने तेज किया आंदोलन

छत्तीसगढ़ प्रेस एवं मीडिया वेलफेयर एसोसिएशन (PMWA) ने इस मामले को प्रमुखता से उठाते हुए संजीव तिवारी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि लंबे समय से प्राप्त शिकायतों और आरोपों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है ताकि पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सके।

ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि छत्तीसगढ़ प्रेस एवं मीडिया वेलफेयर एसोसिएशन के संभागीय अध्यक्ष रवि दुबे एवं अन्य पदाधिकारियों द्वारा 12 जून 2026 को इस संबंध में एक पत्र प्रेषित किया गया था। उक्त पत्र के आधार पर कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी कार्यालय, बस्तर द्वारा आवश्यक कार्रवाई के लिए मामले को अग्रेषित किया गया है।

जांच पूरी होने तक पद से हटाने की मांग

ज्ञापन में स्पष्ट रूप से मांग की गई है कि संजीव तिवारी के विरुद्ध प्राप्त शिकायतों, कथित भ्रष्टाचार एवं अन्य गंभीर आरोपों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही यह भी कहा गया है कि जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए उन्हें जांच पूरी होने तक उनके वर्तमान पद से हटाया जाए।

ज्ञापन में यह भी मांग की गई है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी अथवा केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से कराई जाए, ताकि जांच प्रक्रिया पर किसी प्रकार का संदेह न रहे।

प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में चर्चा

मामले के हाईकोर्ट तक पहुंचने के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। जनसंपर्क विभाग से जुड़े इस मामले को लेकर विभिन्न स्तरों पर प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। हालांकि अभी तक आरोपों की किसी सक्षम एजेंसी द्वारा पुष्टि नहीं हुई है और न ही जांच की अंतिम रिपोर्ट सार्वजनिक हुई है।

जांच के बाद ही सामने आएगी सच्चाई

फिलहाल पूरा मामला जांच की मांग और आरोपों के स्तर पर है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित प्रशासनिक और न्यायिक संस्थाएं इस प्रकरण पर क्या रुख अपनाती हैं तथा जांच की मांग को लेकर आगे क्या कार्रवाई होती है।

नोट: संजीव तिवारी के विरुद्ध लगाए गए आरोप ज्ञापन में व्यक्त शिकायतों और मांगों पर आधारित हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हुई है। संबंधित पक्ष का आधिकारिक पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

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