रायपुर | भारत36नेशनल डेस्क
राजधानी रायपुर के बोरियाखुर्द क्षेत्र स्थित थेरेसियन अकादमी में पढ़ने वाले कक्षा 10वीं और कक्षा 8वीं के दो विद्यार्थियों को फीस बकाया होने के कारण कथित रूप से मानसिक दबाव में रखे जाने का मामला सामने आया है। अभिभावकों ने विद्यालय प्रबंधन पर आरोप लगाया है कि फीस जमा कराने के लिए बच्चों को बार-बार टोकने, सार्वजनिक रूप से फीस का उल्लेख करने और कक्षा में अलग व्यवहार करने जैसी गतिविधियों के कारण दोनों विद्यार्थी मानसिक तनाव का सामना कर रहे हैं।
परिजनों के अनुसार आर्थिक परिस्थितियों के चलते निर्धारित समय पर स्कूल फीस जमा नहीं हो सकी। इसके बावजूद विद्यालय प्रशासन द्वारा सीधे बच्चों पर फीस को लेकर दबाव बनाया जा रहा है। अभिभावकों का कहना है कि फीस संबंधी विषय अभिभावकों और विद्यालय प्रबंधन के बीच का मामला है, लेकिन इसका असर बच्चों की पढ़ाई और मानसिक स्थिति पर पड़ रहा है।
बताया जा रहा है कि कक्षा 10वीं का छात्र आगामी बोर्ड परीक्षा की तैयारी कर रहा है, जबकि कक्षा 8वीं का छात्र भी नियमित रूप से विद्यालय में अध्ययनरत है। दोनों विद्यार्थियों ने घर पर फीस को लेकर चिंता और तनाव व्यक्त किया है। परिजनों का आरोप है कि विद्यालय में फीस को लेकर बार-बार पूछताछ और कथित दबाव के कारण बच्चों में भय और असहजता का माहौल बन गया है, जिससे उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
शिक्षा विशेषज्ञों ने जताई चिंता
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि फीस बकाया होने की स्थिति में विद्यालय प्रबंधन को संवेदनशीलता और मानवीय दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी विद्यार्थी को उसकी आर्थिक स्थिति के आधार पर अपमानित करना या मानसिक दबाव में रखना उचित नहीं है। ऐसी परिस्थितियां बच्चों के आत्मविश्वास, मानसिक स्वास्थ्य और शैक्षणिक प्रदर्शन पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती हैं।
अभिभावकों ने की जांच की मांग
अभिभावकों ने मांग की है कि विद्यालय प्रबंधन फीस संबंधी मामलों में बच्चों को माध्यम न बनाए और सीधे अभिभावकों से संवाद स्थापित करे। उन्होंने जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग से मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने की मांग भी की है, ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई और मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित न हो।
विद्यालय प्रबंधन का पक्ष नहीं मिला

इस संबंध में विद्यालय प्रबंधन से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन समाचार लिखे जाने तक उनका पक्ष प्राप्त नहीं हो सका। विद्यालय प्रशासन की प्रतिक्रिया प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
उठ रहे महत्वपूर्ण सवाल
▪ क्या फीस बकाया होने पर छात्रों पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष दबाव बनाया जा रहा है?
▪ क्या विद्यालय द्वारा अभिभावकों से संवाद के बजाय बच्चों को माध्यम बनाया जा रहा है?
▪ छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य की जिम्मेदारी कौन लेगा?
▪ क्या शिक्षा विभाग इस मामले की जांच करेगा?
स्थानीय नागरिकों और अभिभावकों का कहना है कि शिक्षा का वातावरण भयमुक्त, सम्मानजनक और छात्र हितैषी होना चाहिए। आर्थिक कठिनाइयों का बोझ बच्चों पर डालना उनके मानसिक विकास और शैक्षणिक भविष्य के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। ऐसे में संबंधित अधिकारियों से मामले का संज्ञान लेकर उचित समाधान सुनिश्चित करने की मांग की जा रही है।

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