पीएसवाय राष्ट्रीय उत्कृष्टता सम्मान समारोह में मेधावी विद्यार्थियों और शिक्षा अधिकारियों का हुआ सम्मान, विद्यार्थियों को दी बड़ी सीख
रायपुर | 18 जुलाई 2026 | भारत36नेशनल डेस्क
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में आयोजित पीएसवाय एजुकेशन एंड रिसर्च फेडरेशन के राष्ट्रीय उत्कृष्टता सम्मान समारोह एवं पदक तथा निधि वितरण-2026 में राज्यपाल श्री रमेन डेका ने विद्यार्थियों को सफलता के साथ-साथ संतुलित जीवन जीने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि मोबाइल और डिजिटल एडिक्शन से बचना आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। गूगल और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) उपयोगी साधन हैं, लेकिन वे मानव बुद्धि और मौलिक सोच का स्थान कभी नहीं ले सकते।
रायपुर के विमतारा ऑडिटोरियम में आयोजित इस समारोह में प्रदेश के विभिन्न जिलों के मेधावी विद्यार्थियों, उत्कृष्ट जिला शिक्षा अधिकारियों और शिक्षा क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले व्यक्तियों को सम्मानित किया गया।
“जीवन में गूगल इफेक्ट नहीं होना चाहिए”
मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए राज्यपाल श्री रमेन डेका ने कहा कि विद्यार्थियों को तकनीक का उपयोग केवल अध्ययन और उपयोगी कार्यों तक सीमित रखना चाहिए। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि डिजिटल एडिक्शन भी अन्य नशों की तरह नुकसानदायक है।

उन्होंने कहा कि आज इंटरनेट और एआई का दौर है, लेकिन विद्यार्थियों को अपनी सोचने, समझने और निर्णय लेने की क्षमता को विकसित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि “जीवन में गूगल इफेक्ट नहीं होना चाहिए। मानव बुद्धि ही सर्वोच्च है।”
मेहनत और लगन ही सफलता की असली कुंजी
राज्यपाल ने अपने छात्र जीवन का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके समय में सीमित संसाधनों के बावजूद मेहनत और अनुशासन के बल पर शिक्षा प्राप्त की जाती थी। आज सुविधाएं अधिक हैं, लेकिन सफलता का आधार आज भी कड़ी मेहनत, निरंतर अध्ययन और आत्मविश्वास ही है।
उन्होंने विद्यार्थियों से बड़े सपने देखने का आह्वान करते हुए कहा कि किसी व्यक्ति की पृष्ठभूमि नहीं, बल्कि उसका संकल्प, परिश्रम और समर्पण उसके भविष्य का निर्माण करता है।
हर बच्चा अलग है, तुलना न करें: राज्यपाल
राज्यपाल ने अभिभावकों से अपील करते हुए कहा कि वे बच्चों की तुलना दूसरों से न करें। प्रत्येक विद्यार्थी की अपनी अलग प्रतिभा और रुचि होती है। उन्होंने कहा कि सभी बच्चों का आईआईटी या मेडिकल में जाना आवश्यक नहीं है।
उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 विद्यार्थियों को उनकी रुचि के अनुरूप शिक्षा और करियर चुनने के पर्याप्त अवसर प्रदान करती है। अभिभावकों को बच्चों की क्षमता पहचानकर उसी दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना चाहिए।
सच्ची सफलता संतुष्टि और अच्छे संबंधों में
राज्यपाल ने कहा कि केवल सफल होना ही जीवन का उद्देश्य नहीं है। वास्तव में वही व्यक्ति सबसे अधिक खुश रहता है जो अपने जीवन से संतुष्ट हो और परिवार, मित्रों तथा समाज के साथ सौहार्दपूर्ण संबंध बनाए रखे।
उन्होंने कहा कि समारोह में सम्मानित होने वाले विद्यार्थियों की सफलता के पीछे उनके माता-पिता के त्याग और गुरुजनों के मार्गदर्शन की महत्वपूर्ण भूमिका है।
धरमलाल कौशिक बोले- शिक्षा ही उज्ज्वल भविष्य की नींव
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि एवं विधायक तथा पूर्व विधानसभा अध्यक्ष श्री धरमलाल कौशिक ने कहा कि बच्चे देश का भविष्य हैं। प्रत्येक विद्यार्थी के जीवन में स्पष्ट लक्ष्य होना चाहिए और उस लक्ष्य तक पहुंचने का सबसे प्रभावी माध्यम शिक्षा है। उन्होंने कहा कि शिक्षा पर जितना अधिक ध्यान दिया जाएगा, भविष्य उतना ही बेहतर होगा।
अनुशासन और निरंतर सीखना जरूरी: पुरंदर मिश्रा
विधायक श्री पुरंदर मिश्रा ने विद्यार्थियों को अनुशासन, कठिन परिश्रम और लगातार सीखते रहने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि बदलते समय में सफलता उन्हीं लोगों को मिलती है जो सीखना कभी बंद नहीं करते।
कार्यक्रम में इनकी रही प्रमुख उपस्थिति
कार्यक्रम की शुरुआत पीएसवाय शैक्षणिक एवं अनुसंधान संघ के निदेशक डॉ. एस.के. मिश्रा ने स्वागत उद्बोधन और कार्यक्रम के उद्देश्य की जानकारी देकर की। अंत में मुख्य योजना समन्वयक श्रीमती शुभ्रा शुक्ला मिश्रा ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर सीबीएसई के क्षेत्रीय निदेशक श्री जगदीश बर्मन, पीएसवाय के पदाधिकारी, प्रदेश के सभी संभागों से आए जिला शिक्षा अधिकारी, प्राचार्य, शिक्षक, सम्मानित विद्यार्थी एवं उनके अभिभावक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
मुख्य बिंदु
- राज्यपाल रमेन डेका ने डिजिटल एडिक्शन से दूर रहने की दी सलाह।
- एआई और गूगल को बताया उपयोगी, लेकिन मानव बुद्धि का विकल्प नहीं।
- मेधावी विद्यार्थियों एवं उत्कृष्ट जिला शिक्षा अधिकारियों का सम्मान।
- अभिभावकों से बच्चों की तुलना न करने और उनकी प्रतिभा पहचानने की अपील।
- राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अवसरों का लाभ उठाने पर दिया जोर।
- धरमलाल कौशिक और पुरंदर मिश्रा ने शिक्षा, अनुशासन और लक्ष्य निर्धारण का महत्व बताया।
— भारत36नेशनल






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