76% आरक्षण संशोधन विधेयक पर कांग्रेस ने उठाए सवाल, कहा—ढाई-तीन साल से राजभवन में लंबित है विधेयक; आदिवासी, ओबीसी और अनुसूचित जाति के अधिकार प्रभावित होने का आरोप
रायपुर, 28 अगस्त 2026। छत्तीसगढ़ में आरक्षण के मुद्दे को लेकर एक बार फिर सियासी घमासान तेज हो गया है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने भाजपा सरकार पर आरक्षित वर्गों के हितों की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार द्वारा पारित नवीन आरक्षण संशोधन विधेयक को लंबे समय से राजभवन में लंबित रखा गया है, जिससे प्रदेश के आदिवासी, अनुसूचित जाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के लोगों के शिक्षा एवं रोजगार से जुड़े अधिकार प्रभावित हो रहे हैं।
दीपक बैज ने इसे आरक्षित वर्गों के साथ अन्याय बताते हुए भाजपा सरकार से माफी मांगने की मांग की है। कांग्रेस का दावा है कि वर्ष 2022 में विधानसभा से पारित 76 प्रतिशत आरक्षण संबंधी नवीन विधेयक 2 दिसंबर 2022 से राजभवन में अनुमोदन के लिए लंबित है।
“90 प्रतिशत आबादी के अधिकारों से जुड़ा है विधेयक”
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने प्रदेश की विभिन्न सामाजिक श्रेणियों को उनकी आबादी के अनुपात में आरक्षण का लाभ दिलाने के उद्देश्य से नवीन आरक्षण संशोधन विधेयक पारित किया था।
कांग्रेस के अनुसार, इस विधेयक में अनुसूचित जनजाति के लिए 32 प्रतिशत, अनुसूचित जाति के लिए 13 प्रतिशत और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया था। इसके अलावा आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (EWS) के लिए 4 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था किए जाने की बात भी कांग्रेस ने कही है।
दीपक बैज का आरोप है कि यह प्रावधान प्रदेश की बड़ी आबादी के शिक्षा और रोजगार से जुड़े अवसरों पर सीधे प्रभाव डालता है, लेकिन विधेयक के लंबित रहने के कारण संबंधित वर्गों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है।
भाजपा पर “षड्यंत्र” का आरोप
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि भाजपा नेताओं की दुर्भावना और कथित षड्यंत्र के चलते आरक्षण विधेयक राजभवन में लंबित है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में विधानसभा से पारित किए गए इस विधेयक पर अब राज्य की भाजपा सरकार को अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए।
बैज ने कहा कि कांग्रेस पर तथ्यहीन आरोप लगाने के बजाय भाजपा नेताओं को आरक्षण के मुद्दे पर अपनी स्थिति जनता के सामने रखनी चाहिए।
SC-ST और OBC आरक्षण को लेकर भी सवाल
दीपक बैज ने आरोप लगाया कि पूर्व की भाजपा सरकार के कार्यकाल में अनुसूचित जाति का आरक्षण घटाया गया था और ओबीसी वर्ग को भी उनके अधिकारों से वंचित किया गया। उन्होंने भाजपा पर आदिवासी हितों के खिलाफ षड्यंत्र करने का भी आरोप लगाया।
कांग्रेस अध्यक्ष ने दावा किया कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने वर्ष 2022 के नवीन आरक्षण विधेयक के माध्यम से विभिन्न वर्गों को उनकी आबादी के अनुरूप आरक्षण देने का प्रयास किया था।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी कांग्रेस ने दिया हवाला
कांग्रेस ने अपने बयान में हालिया सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि विधानसभा से पारित विधेयकों पर राजभवन को त्वरित निर्णय लेना चाहिए।
दीपक बैज ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और भाजपा के आरक्षित वर्गों से आने वाले नेताओं से सवाल किया कि वे राजभवन से 76 प्रतिशत आरक्षण विधेयक पर जल्द हस्ताक्षर कराने की मांग कब करेंगे।
कांग्रेस का कहना है कि राज्य सरकार को इस मामले में पहल करते हुए महामहिम राज्यपाल से विधेयक पर शीघ्र निर्णय का आग्रह करना चाहिए।
“राजभवन में बंधक हैं अधिकार”—कांग्रेस
दीपक बैज ने कहा कि पिछले कई वर्षों से आरक्षण से संबंधित प्रावधान लंबित रहने के कारण प्रदेश की बहुसंख्यक आबादी के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने भाजपा सरकार और राजभवन से सर्वसमाज के हित में इस मामले में हठधर्मिता छोड़कर आरक्षण संशोधन विधेयक पर निर्णय कराने की मांग की।
कांग्रेस ने कहा कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और सामान्य वर्ग के गरीबों के सामाजिक न्याय एवं अधिकारों से जुड़े इस महत्वपूर्ण विषय पर सरकार को तत्काल कदम उठाना चाहिए।
भाजपा से कांग्रेस ने मांगा स्पष्ट जवाब
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने भाजपा से छत्तीसगढ़ नवीन आरक्षण विधेयक 2022 को लेकर अपना रुख स्पष्ट करने की मांग की है। उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और भाजपा के आरक्षित वर्गों के नेताओं से पूछा कि वे राज्यपाल से विधेयक पर शीघ्र हस्ताक्षर कराने के लिए कब पहल करेंगे।
कांग्रेस ने यह भी मांग की है कि आरक्षण विधेयक पर जल्द निर्णय लेकर प्रदेश के विभिन्न वर्गों के शिक्षा और रोजगार से जुड़े अधिकारों को कानूनी संरक्षण दिया जाए।
कांग्रेस का सीधा आरोप
कांग्रेस के मुताबिक, 76 प्रतिशत आरक्षण विधेयक लंबे समय से राजभवन में लंबित है और इसके कारण आरक्षित वर्गों के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। वहीं भाजपा सरकार से कांग्रेस ने इस पूरे मामले में अपना रुख सार्वजनिक करने और विधेयक को मंजूरी दिलाने के लिए पहल करने की मांग की है।
यह बयान छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष दीपक बैज की ओर से जारी राजनीतिक प्रतिक्रिया पर आधारित है।

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