होली क्रॉस वुमेन्स कॉलेज के प्राध्यापक अकील अहमद अंसारी के समर्थन में उतरा जन अधिकार परिषद

जन अधिकार परिषद ने कॉलेज प्राचार्य को सौंपा ज्ञापन, सामाजिक न्याय और जनहित के मुद्दों पर अंसारी की सक्रियता का किया समर्थन

अम्बिकापुर, सरगुजा।
होली क्रॉस वुमेन्स कॉलेज, अम्बिकापुर के वरिष्ठ प्राध्यापक अकील अहमद अंसारी के सामाजिक एवं जनहित से जुड़े कार्यों के समर्थन में जन अधिकार परिषद, छत्तीसगढ़ सामने आया है। परिषद के प्रतिनिधिमंडल ने कॉलेज की प्राचार्य को एक ज्ञापन सौंपकर प्राध्यापक अंसारी की सामाजिक गतिविधियों और नागरिक सरोकारों को लेकर अपनी बात रखी।

ज्ञापन सौंपने के दौरान जन अधिकार परिषद के संयोजक त्रिभुवन सिंह, रणविजय सिंह तोमर, दीपक नौटियाल, अजय गुप्ता, धीरेंद्र दुबे सहित कई वरिष्ठ नागरिक मौजूद रहे।

सामाजिक न्याय के मुद्दों पर सक्रियता का उल्लेख

जन अधिकार परिषद ने अपने ज्ञापन में कहा है कि प्राध्यापक अकील अहमद अंसारी अपने शैक्षणिक दायित्वों का निर्वहन करने के साथ-साथ सामाजिक मुद्दों पर भी सक्रिय रहते हैं। परिषद के अनुसार, अंसारी सोशल मीडिया और विभिन्न नागरिक अभियानों के माध्यम से अन्याय, अत्याचार, शोषण, महिला उत्पीड़न तथा सामाजिक न्याय से जुड़े मामलों को उठाते रहे हैं।

परिषद का कहना है कि सामाजिक सरोकारों से जुड़े मुद्दों पर तथ्य सामने रखना और पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए आवाज उठाना एक जागरूक नागरिक की भूमिका का हिस्सा हो सकता है।

संविधान के अनुच्छेद 19(1)(क) का दिया हवाला

ज्ञापन में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1)(क) का भी उल्लेख किया गया है। परिषद ने कहा है कि संविधान नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मौलिक अधिकार प्रदान करता है।

परिषद के मुताबिक, इसी संवैधानिक अधिकार के तहत नागरिक सामाजिक एवं जनहित के मुद्दों पर अपनी बात रख सकते हैं और न्याय से संबंधित विषयों को सार्वजनिक विमर्श में ला सकते हैं।

हालांकि, किसी भी सार्वजनिक मंच पर लगाए गए आरोपों अथवा साझा की गई सूचनाओं की तथ्यात्मकता और कानूनी स्थिति का निर्धारण संबंधित सक्षम प्राधिकारी अथवा न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से ही किया जा सकता है।

विभिन्न मामलों में पीड़ितों के पक्ष में आवाज उठाने का दावा

जन अधिकार परिषद ने ज्ञापन में दावा किया है कि अकील अहमद अंसारी ने अम्बिकापुर स्थित अनुपम वस्त्रालय में एक गरीब आदिवासी महिला से जुड़े कथित उत्पीड़न के मामले सहित ग्राम भफौली, भिट्ठी, राजपुर, शंकरगढ़ और सलका से जुड़े विभिन्न आपराधिक प्रकरणों में पीड़ितों को न्याय दिलाने की पहल की।

परिषद के अनुसार, इन मामलों से संबंधित तथ्यों एवं जानकारियों को सोशल मीडिया के माध्यम से सामने लाने का प्रयास किया गया।

ज्ञापन में परिषद ने यह भी कहा है कि ऐसे मामलों में पीड़ित पक्ष की आवाज को उचित मंच तक पहुंचाना सामाजिक जिम्मेदारी का हिस्सा है।

UGC 2018 के दिशानिर्देशों का उल्लेख

ज्ञापन में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के 2018 से संबंधित शिक्षक दिशानिर्देशों का भी संदर्भ दिया गया है। परिषद का कहना है कि शिक्षक की भूमिका केवल कक्षा में पढ़ाने तक सीमित नहीं होती, बल्कि सामाजिक जागरूकता, सामुदायिक गतिविधियों और समाज के विकास में भी शिक्षक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

इसी आधार पर परिषद ने प्राध्यापक अकील अहमद अंसारी की सामाजिक गतिविधियों को उनके नागरिक सरोकारों से जोड़ते हुए कॉलेज प्रबंधन के समक्ष अपना पक्ष रखा है।

कॉलेज प्रबंधन से निष्पक्ष विचार की अपील

जन अधिकार परिषद ने कॉलेज प्रबंधन से अपील की है कि प्राध्यापक अकील अहमद अंसारी के खिलाफ की जा रही व्यक्तिगत शिकायतों अथवा विरोध से जुड़े मामलों पर निष्पक्षता और तथ्यों के आधार पर विचार किया जाए।

परिषद ने अपने ज्ञापन में कहा है कि यदि किसी शिक्षक के खिलाफ कोई शिकायत या आरोप सामने आता है, तो संबंधित पक्षों को सुनकर और उपलब्ध तथ्यों की जांच के बाद ही उचित निर्णय लिया जाना चाहिए।

परिषद ने कॉलेज प्रबंधन से यह भी आग्रह किया कि सामाजिक एवं जनहित के मुद्दों पर काम करने वाले अनुभवी शिक्षकों के प्रयासों को सकारात्मक दृष्टि से देखा जाए।

कई उच्च अधिकारियों को भेजी गई ज्ञापन की प्रतिलिपि

मामले को व्यापक स्तर पर उठाते हुए जन अधिकार परिषद ने ज्ञापन की प्रतिलिपियां विभिन्न संस्थानों एवं अधिकारियों को भी भेजी हैं।

परिषद के अनुसार, ज्ञापन की प्रतिलिपि निम्न अधिकारियों एवं संस्थानों को सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजी गई है—

  • विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC), नई दिल्ली
  • केंद्रीय क्षेत्रीय कार्यालय, भोपाल
  • उच्च शिक्षा विभाग, मंत्रालय, रायपुर
  • कुलपति, संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय, अम्बिकापुर
  • आयुक्त, सरगुजा संभाग
  • कलेक्टर, सरगुजा

अब कॉलेज प्रबंधन के रुख पर नजर

जन अधिकार परिषद द्वारा ज्ञापन सौंपे जाने के बाद अब इस मामले में कॉलेज प्रबंधन और संबंधित उच्च शिक्षा अधिकारियों के रुख पर नजर रहेगी।

वहीं, प्राध्यापक अकील अहमद अंसारी से जुड़े आरोपों, शिकायतों अथवा उनके सामाजिक कार्यों को लेकर यदि संबंधित कॉलेज प्रशासन, विश्वविद्यालय या अन्य पक्ष की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आती है, तो मामले की तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।

भारत36National की नजर इस पूरे घटनाक्रम पर बनी हुई है।

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