बिना खुली प्रतिस्पर्धा और टेंडर के पांच साल के लिए लैब संचालन का काम देने पर उठाए सवाल, CBC जांच के 45 से बढ़कर 197 रुपये और विटामिन जांचों की दरों में वृद्धि का किया दावा
रायपुर, 12 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ में सरकारी अस्पतालों की पैथोलॉजी जांच दरों में प्रस्तावित बढ़ोतरी को लेकर प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने राज्य सरकार पर स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर आम जनता पर आर्थिक बोझ डालने और लैब संचालन की प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरतने का आरोप लगाया है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ प्रवक्ता सत्यप्रकाश सिंह ने इसे ‘हाई लेवल लूट का नया मॉडल’ करार देते हुए सरकार से जांच दरों में वृद्धि, कंपनी के चयन और अनुबंध की शर्तों पर जवाब मांगा है।
कांग्रेस प्रवक्ता का आरोप है कि सरकारी अस्पतालों में जांच सेवाओं के संचालन के लिए कंपनी को पांच साल का काम देने के बावजूद खुली प्रतिस्पर्धा और पारदर्शी टेंडर प्रक्रिया नहीं अपनाई गई। उन्होंने सवाल उठाया कि जब मध्यप्रदेश में केंद्र सरकार के सार्वजनिक उपक्रम एचएलएल (HLL) ने कथित तौर पर 69 प्रतिशत तक की छूट की पेशकश की, तब उसे काम नहीं मिला, जबकि छत्तीसगढ़ में केवल 14 प्रतिशत छूट पर कंपनी को काम कैसे सौंपा गया?
कांग्रेस ने इस पूरे मामले में राज्य सरकार से चयन प्रक्रिया, वित्तीय शर्तों और जनता पर पड़ने वाले अतिरिक्त आर्थिक भार का विवरण सार्वजनिक करने की मांग की है।
जांच दरों में कई गुना वृद्धि का दावा, CBC जांच का उदाहरण दिया
सत्यप्रकाश सिंह ने आरोप लगाया कि नई व्यवस्था के तहत कई सामान्य और महत्वपूर्ण मेडिकल जांचों की दरों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उन्होंने पुराने और प्रस्तावित शुल्क की तुलना करते हुए कहा कि इसका सीधा असर सरकारी अस्पतालों में इलाज कराने वाले गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों पर पड़ सकता है।
कांग्रेस की प्रेस विज्ञप्ति में दिए गए आंकड़ों के अनुसार:
- CBC जांच: पहले 45 रुपये, अब कथित तौर पर 197 रुपये।
- विटामिन-D जांच: पहले 277 रुपये, अब कथित तौर पर 847 रुपये।
- विटामिन-B12 जांच: पहले 138 रुपये, अब कथित तौर पर 657 रुपये।
इन आंकड़ों के आधार पर कांग्रेस ने दावा किया है कि नई दरों से मरीजों को पहले की तुलना में काफी अधिक भुगतान करना पड़ सकता है।
यदि ये दरें संबंधित सरकारी अस्पतालों में लागू होती हैं, तो मरीजों के जांच खर्च में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। विशेष रूप से उन परिवारों के लिए यह चुनौतीपूर्ण होगा, जिन्हें बीमारी की पहचान और उपचार के दौरान बार-बार रक्त परीक्षण, विटामिन जांच तथा अन्य पैथोलॉजी जांचों की आवश्यकता पड़ती है।
हालांकि, इन दरों की वास्तविक स्थिति, उनके लागू होने की तारीख, संबंधित जांचों की श्रेणी और पुराने एवं नए शुल्क की आधिकारिक तुलना की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
बिना खुली टेंडर प्रक्रिया के पांच साल का अनुबंध देने पर सवाल
कांग्रेस ने लैब संचालन के लिए कंपनी के चयन की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए हैं। सत्यप्रकाश सिंह के अनुसार, कंपनी को पांच साल के लिए काम देने में खुली प्रतिस्पर्धा और टेंडर प्रक्रिया नहीं अपनाई गई तथा कैबिनेट के निर्णय के माध्यम से मंजूरी दी गई।
उन्होंने सवाल किया कि जब अलग-अलग राज्यों में कंपनियों की ओर से अधिक छूट की पेशकश किए जाने का दावा किया जा रहा है, तो छत्तीसगढ़ में कम छूट वाली व्यवस्था को क्यों चुना गया?
कांग्रेस के मुताबिक, मध्यप्रदेश में 69 प्रतिशत, महाराष्ट्र में 77 प्रतिशत और बिहार में 24 प्रतिशत तक छूट दिए जाने की बात सामने आई है। पार्टी ने इन आंकड़ों का हवाला देते हुए राज्य सरकार से स्पष्ट करने की मांग की है कि छत्तीसगढ़ में कंपनी के चयन के लिए किन वित्तीय और तकनीकी मानदंडों को आधार बनाया गया।
इस मामले में महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या चयन प्रक्रिया में उपलब्ध विकल्पों की तुलनात्मक जांच की गई थी, क्या अलग-अलग कंपनियों के प्रस्तावों का मूल्यांकन हुआ था और क्या अनुबंध की शर्तें राज्य के लिए आर्थिक रूप से लाभकारी हैं।
इन सवालों का स्पष्ट उत्तर संबंधित निविदा दस्तावेजों, कैबिनेट के निर्णय, अनुबंध की शर्तों और आधिकारिक वित्तीय विवरणों से ही सामने आ सकता है। कांग्रेस ने प्रक्रिया पर गंभीर आरोप लगाए हैं, लेकिन इन आरोपों के आधार पर अपने आप किसी अनियमितता या भ्रष्टाचार को सिद्ध नहीं माना जा सकता।
ग्रामीण क्षेत्रों में जांच खर्च बढ़ने की आशंका
कांग्रेस ने ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में जांच दरों को लेकर भी चिंता जताई है। सत्यप्रकाश सिंह का आरोप है कि ग्रामीण अंचलों में भी कंपनी द्वारा टियर-2 शहरों के अनुरूप दरें लागू की जाएंगी, जिसके कारण राज्य सरकार को 20 प्रतिशत अतिरिक्त भुगतान करना पड़ सकता है।
कांग्रेस ने सरकार से पूछा है कि यदि ग्रामीण क्षेत्रों में जांच सेवाओं के संचालन के लिए अतिरिक्त भुगतान किया जाना है, तो उसकी गणना किस आधार पर की गई है और इससे सरकारी खजाने पर कुल कितना वित्तीय भार पड़ेगा।
ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता पहले से ही एक महत्वपूर्ण चुनौती है। ऐसे में जांच सेवाओं के लिए निर्धारित दरें, उनकी वास्तविक उपलब्धता, नमूनों के परिवहन की व्यवस्था और रिपोर्ट मिलने में लगने वाला समय मरीजों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं।
यदि नई व्यवस्था में सरकारी खर्च बढ़ता है, तो उसके बदले मिलने वाली सेवाओं की गुणवत्ता, जांच की विश्वसनीयता और समयबद्ध रिपोर्टिंग का आकलन करना भी आवश्यक होगा।
सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की स्थिति पर भी कांग्रेस ने उठाए सवाल
सत्यप्रकाश सिंह ने प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था की व्यापक स्थिति पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी, जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल और दवाइयों की अनुपलब्धता जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं।
उन्होंने कहा कि दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में समय पर चिकित्सा सुविधा नहीं मिलने के कारण मरीजों और उनके परिजनों को कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। कांग्रेस प्रवक्ता ने दावा किया कि कुछ क्षेत्रों में मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाने के लिए परिजनों को कई किलोमीटर पैदल चलने तक की नौबत आती है।
कांग्रेस का कहना है कि ऐसी परिस्थितियों में सरकार की प्राथमिकता सरकारी अस्पतालों की क्षमता बढ़ाना, पर्याप्त चिकित्सक एवं दवाइयां उपलब्ध कराना और मरीजों को सस्ती जांच सेवाएं देना होना चाहिए।
इन आरोपों के संदर्भ में जिलेवार डॉक्टरों की उपलब्धता, अस्पतालों में दवाइयों के स्टॉक, रिक्त पदों, मरीजों के भार और स्वास्थ्य सेवाओं के प्रदर्शन से जुड़े आधिकारिक आंकड़ों का परीक्षण आवश्यक है।
‘स्वास्थ्य सेवाएं व्यापार नहीं, गरीब मरीजों की जरूरत’
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाएं सामान्य व्यापारिक गतिविधि नहीं हैं, बल्कि उन गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों की बुनियादी जरूरत हैं, जो सरकारी अस्पतालों पर निर्भर रहते हैं। उनके मुताबिक, जांच शुल्क में बढ़ोतरी से मरीजों के सामने इलाज जारी रखने और घरेलू खर्चों के बीच संतुलन बनाने की कठिनाई बढ़ सकती है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों से आम जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है और निजी कंपनी को लाभ पहुंचाने वाली व्यवस्था तैयार की जा रही है। कांग्रेस ने इसे जनता के स्वास्थ्य अधिकारों से जुड़ा विषय बताते हुए सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग की।
हालांकि, जांच शुल्क में वृद्धि का वास्तविक प्रभाव इस बात पर भी निर्भर करेगा कि संबंधित मरीजों को जांच मुफ्त उपलब्ध है, किसी सरकारी योजना के तहत कवर किया जाता है या उन्हें निर्धारित शुल्क स्वयं चुकाना पड़ता है। इसलिए नई दरों के साथ लागू छूट, पात्रता और सरकारी भुगतान की व्यवस्था स्पष्ट करना भी जरूरी है।
सरकार से कांग्रेस के प्रमुख सवाल
कांग्रेस ने राज्य सरकार से निम्नलिखित बिंदुओं पर स्पष्टीकरण देने की मांग की है:
- लैब संचालन के लिए कंपनी का चयन किस प्रक्रिया के तहत किया गया?
- क्या खुली निविदा या प्रतिस्पर्धी वित्तीय प्रस्ताव आमंत्रित किए गए थे?
- यदि अन्य राज्यों में अधिक छूट के प्रस्ताव उपलब्ध थे, तो छत्तीसगढ़ में कम छूट वाली व्यवस्था क्यों चुनी गई?
- CBC, विटामिन-D और विटामिन-B12 सहित विभिन्न जांचों की पुरानी और नई दरों का आधिकारिक विवरण क्या है?
- ग्रामीण क्षेत्रों में टियर-2 शहरों के अनुरूप दरें लागू करने और 20 प्रतिशत अतिरिक्त भुगतान करने का आधार क्या है?
- पांच साल के अनुबंध से राज्य सरकार पर कुल कितना वित्तीय भार पड़ेगा?
- क्या गरीब मरीजों और सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के लाभार्थियों को इन बढ़ी हुई दरों से छूट मिलेगी?
- क्या सरकार अनुबंध, दर निर्धारण और कंपनी चयन से संबंधित दस्तावेज सार्वजनिक करेगी?
पारदर्शिता और जवाबदेही पर टिकी निगाहें
सरकारी अस्पतालों में पैथोलॉजी जांच की दरों और लैब संचालन के लिए कंपनी के चयन को लेकर उठे सवाल अब स्वास्थ्य सेवाओं की लागत, सरकारी खरीद प्रक्रिया और मरीजों के आर्थिक हितों से जुड़ गए हैं।
यदि कांग्रेस द्वारा प्रस्तुत आंकड़े आधिकारिक दस्तावेजों से प्रमाणित होते हैं, तो जांच शुल्क में वृद्धि और अनुबंध की वित्तीय शर्तों की विस्तृत समीक्षा की जरूरत होगी। दूसरी ओर, सरकार के लिए भी यह स्पष्ट करना महत्वपूर्ण होगा कि कंपनी का चयन किस आधार पर हुआ, प्रस्तावित दरों की गणना कैसे की गई और नई व्यवस्था से मरीजों को क्या लाभ मिलेगा।
फिलहाल, कांग्रेस ने इस मामले को लेकर राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। इन आरोपों पर सरकार का आधिकारिक पक्ष, अनुबंध से संबंधित दस्तावेज और जांच दरों की प्रमाणित सूची सामने आने के बाद ही पूरे मामले की वित्तीय एवं प्रशासनिक तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
जारीकर्ता: सत्यप्रकाश सिंह
पद: वरिष्ठ प्रवक्ता, छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी
स्थान: रायपुर, छत्तीसगढ़

📰 वर्ष 2022 से पत्रकारिता जगत में सक्रिय सोनू कुमार ने अपनी पहचान निर्भीक, निष्पक्ष और जनहित की पत्रकारिता से बनाई है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत समय घटति घटना दैनिक अख़बार से रायपुर जिला ब्यूरो चीफ के रूप में की। वर्ष 2023 में रायपुर पत्रिका दैनिक से जुड़ने के बाद
इलेक्ट्रॉनिक मीडिया VIP News मे छत्तीसगढ़ में ब्यूरो चीफ बनाए जाने पर विशेष पहचान मिली।
🎙️ प्रिंट मीडिया के साथ-साथ उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में News 21,बुलंद छत्तीसगढ़ तथा आवाम दुत में ब्युरो प्रमुख Chhattisgarh के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाईं।
📺 वर्तमान में वे “Bharat 36 National” YouTube चैनल एवं 🌐 Bharat36National.com पोर्टल के संपादक के रूप में सक्रिय हैं।
✨ पहचान — बेबाक, तेज़ और सच को जनता तक पहुँचाने वाली पत्रकारिता।



