अपर संचालक संजीव तिवारी की उच्चस्तरीय जांच की मांग तेज, प्रेस एंड मीडिया वेलफेयर एसोसिएशन ने विभिन्न संवैधानिक संस्थाओं को सौंपा ज्ञापन

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रायपुर, 1 जून 2026 | भारत36 नेशनल

छत्तीसगढ़ में जनसंपर्क विभाग की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक पारदर्शिता को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। प्रेस एंड मीडिया वेलफेयर एसोसिएशन, छत्तीसगढ़ ने जनसंपर्क विभाग के अपर संचालक संजीव तिवारी के संबंध में प्राप्त शिकायतों, आरोपों एवं कथित अनियमितताओं की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग करते हुए विभिन्न संवैधानिक एवं प्रशासनिक संस्थाओं को विस्तृत ज्ञापन सौंपा है।

संगठन के प्रदेश प्रधान महासचिव राहुल कुमार मिश्रा के नेतृत्व में सौंपे गए इस ज्ञापन को प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, उच्च न्यायालय बिलासपुर के मुख्य न्यायाधीश, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के निदेशक, जनसंपर्क विभाग के सचिव सहित अन्य सक्षम अधिकारियों को संबोधित किया गया है।

शिकायतों और आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग

ज्ञापन में कहा गया है कि जनसंपर्क विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर समय-समय पर पत्रकारों, मीडिया संस्थानों तथा आम नागरिकों द्वारा विभिन्न शिकायतें और सवाल उठाए जाते रहे हैं। संगठन का कहना है कि इन शिकायतों की स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच कर वास्तविक तथ्यों को जनता के समक्ष लाया जाना आवश्यक है।

संगठन ने मांग की है कि मामले की जांच राज्य स्तरीय विशेष जांच दल (एसआईटी), आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) अथवा आवश्यकता पड़ने पर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) जैसी सक्षम एजेंसियों से कराई जाए।

विज्ञापन वितरण और वित्तीय पारदर्शिता पर उठे सवाल

ज्ञापन में विज्ञापन वितरण प्रक्रिया, निविदा संबंधी कार्यवाहियों, वित्तीय पारदर्शिता तथा प्रशासनिक निर्णयों से जुड़े विभिन्न बिंदुओं की जांच कराने की मांग की गई है।

संगठन के अनुसार मीडिया जगत के कुछ प्रतिनिधियों द्वारा लंबे समय से विज्ञापन वितरण में कथित अनियमितताओं, प्रक्रियागत पारदर्शिता की कमी तथा विभागीय निर्णयों को लेकर सवाल उठाए जाते रहे हैं। ऐसे में इन सभी पहलुओं की स्वतंत्र जांच आवश्यक है ताकि तथ्यों की स्पष्टता सामने आ सके।

संपत्तियों और आय स्रोतों के सत्यापन की मांग

प्रेस एंड मीडिया वेलफेयर एसोसिएशन ने अपने ज्ञापन में संजीव तिवारी एवं उनके परिवार के सदस्यों की चल-अचल संपत्तियों, आय के स्रोतों तथा शासकीय अभिलेखों में दर्ज विवरणों के सत्यापन की भी मांग की है।

संगठन का कहना है कि यदि किसी प्रकार की शिकायत या संदेह सार्वजनिक रूप से उठाए गए हैं तो संबंधित पक्षों की वित्तीय स्थिति और अभिलेखों का सत्यापन निष्पक्ष जांच प्रक्रिया का हिस्सा होना चाहिए।

दो दशकों की पदस्थापना और स्थानांतरण प्रक्रिया की जांच का आग्रह

ज्ञापन में पिछले लगभग बीस वर्षों के दौरान रायपुर एवं जनसंपर्क विभाग से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर संजीव तिवारी की पदस्थापना और स्थानांतरण प्रक्रियाओं की भी जांच कराने का अनुरोध किया गया है।

संगठन का कहना है कि इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि सभी प्रशासनिक प्रक्रियाएं निर्धारित नियमों, सेवा शर्तों और सरकारी नीतियों के अनुरूप थीं या नहीं।

जांच अवधि में पद से पृथक करने की मांग

संगठन ने कहा है कि यदि मामले की जांच शुरू होती है तो उसकी निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए संबंधित अधिकारी को जांच अवधि तक वर्तमान पद से पृथक करने अथवा अन्यत्र स्थानांतरित करने पर विचार किया जाना चाहिए।

ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो संबंधित मामलों में विधिसम्मत और कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।

न्यायालय में लंबित परिवाद का भी उल्लेख

ज्ञापन में बुलंद छत्तीसगढ़ समाचार पत्र से जुड़े अभय शाह द्वारा न्यायालय में प्रस्तुत परिवाद का उल्लेख करते हुए मामले की निष्पक्ष जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की गई है।

संगठन ने अभय शाह सहित अन्य संबंधित पक्षकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा किसी भी प्रकार के दबाव, हस्तक्षेप अथवा प्रताड़ना की संभावना समाप्त करने के लिए आवश्यक कदम उठाने का भी आग्रह किया है।

15 दिनों में कार्रवाई रिपोर्ट देने की मांग

प्रेस एंड मीडिया वेलफेयर एसोसिएशन ने ज्ञापन पर की गई कार्रवाई की जानकारी 15 दिनों के भीतर उपलब्ध कराने की मांग की है।

संगठन ने स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित समयावधि में उचित कार्रवाई नहीं होती है तो वह उपलब्ध वैधानिक एवं न्यायिक मंचों के माध्यम से आगे की कार्रवाई करेगा।

बड़ी संख्या में पदाधिकारी रहे उपस्थित

ज्ञापन सौंपने के दौरान संगठन के प्रदेश अध्यक्ष राजेंद्र गुप्ता, कार्यकारी अध्यक्ष सोनू रेलवानी, महासचिव सचिन, सहसचिव सहित अनेक पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे।

इस अवसर पर रंजना सिंह, संगीता बर्मन, जानकी मरकाम, मयंक श्रीवास्तव, प्रवीण शर्मा, लोकेश हिरवानी, आनंद गुप्ता, परितोष शर्मा, संतोष यादव सहित अन्य सदस्य भी मौजूद रहे।

पत्रकार हित और पारदर्शिता को लेकर संगठन की पहल

संगठन ने कहा कि यह पहल पत्रकार हितों की सुरक्षा, प्रशासनिक पारदर्शिता तथा जवाबदेही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई है। संगठन का कहना है कि भविष्य में भी जनहित से जुड़े मुद्दों को संवैधानिक एवं वैधानिक तरीकों से उठाया जाता रहेगा।

महत्वपूर्ण तथ्य

  • विभिन्न संवैधानिक और प्रशासनिक संस्थाओं को सौंपा गया ज्ञापन।
  • एसआईटी, ईओडब्ल्यू या सीबीआई जांच की मांग।
  • विज्ञापन वितरण, निविदा प्रक्रिया और वित्तीय पारदर्शिता पर जांच की मांग।
  • संपत्तियों एवं आय स्रोतों के सत्यापन की मांग।
  • पिछले दो दशकों की पदस्थापना और स्थानांतरण प्रक्रिया की जांच का आग्रह।
  • 15 दिनों के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने की मांग।

(नोट: ज्ञापन में लगाए गए आरोप और मांगें संबंधित संगठन द्वारा प्रस्तुत की गई हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अथवा जांच रिपोर्ट अभी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। संबंधित पक्ष का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)

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