‘तेरा राज नहीं आएगा रे’ पुस्तक का विमोचन, नक्सलवाद से मुक्ति के बाद नए बस्तर के निर्माण का संकल्प
रायपुर, 14 जून 2026 | भारत36 नेशनल डेस्क
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने कहा है कि नक्सलवाद के चार दशक लंबे दंश से उबर रहे बस्तर को केंद्र और राज्य सरकार के संयुक्त प्रयासों से देश का सबसे सुंदर, विकसित और समृद्ध आदिवासी संभाग बनाया जाएगा। मुख्यमंत्री ने यह बात राजधानी रायपुर में आयोजित चर्चित पुस्तक ‘तेरा राज नहीं आएगा रे’ के विमोचन समारोह को संबोधित करते हुए कही।
कार्यक्रम में , उप मुख्यमंत्री , साहित्य अकादमी के अध्यक्ष डॉ. शशांक शर्मा, पांचजन्य के संपादक हितेश शंकर सहित बड़ी संख्या में साहित्यकार, पत्रकार, समाजसेवी और विभिन्न क्षेत्रों के प्रबुद्धजन उपस्थित रहे।
नक्सलवाद के कारण विकास से दूर रहा बस्तर
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि नक्सलवाद के कारण बस्तर लंबे समय तक विकास की मुख्यधारा से कट गया था। सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसी बुनियादी सुविधाओं के विस्तार में गंभीर बाधाएं उत्पन्न हुईं। लेकिन अब परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं और बस्तर के समग्र विकास का नया दौर शुरू हो चुका है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य केवल नक्सलवाद का अंत करना नहीं है, बल्कि बस्तर के लोगों को बेहतर जीवन, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और आर्थिक समृद्धि उपलब्ध कराना भी है।
प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में मिली बड़ी सफलता
मुख्यमंत्री ने कहा कि हाल ही में प्रधानमंत्री के नेतृत्व में केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूर्ण हुए हैं। इस दौरान देश ने अनेक ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की हैं, जिनमें नक्सलवाद के विरुद्ध निर्णायक सफलता भी शामिल है।
उन्होंने कहा कि माओवाद देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक था, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री के मार्गदर्शन में इस चुनौती का प्रभावी मुकाबला किया गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मजबूत नेतृत्व समाज में विश्वास और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। इसी कारण देशभर में माओवाद के विरुद्ध जनसमर्थन विकसित हुआ और सुरक्षा बलों का मनोबल भी बढ़ा।
पत्रकारों, लेखकों और बुद्धिजीवियों की भूमिका रही अहम
मुख्यमंत्री ने कहा कि माओवाद के खिलाफ लड़ाई केवल सुरक्षा बलों की नहीं थी, बल्कि इसमें पत्रकारों, लेखकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और बुद्धिजीवियों ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उन्होंने बताया कि हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बस्तर दौरे के दौरान पत्रकारों से मुलाकात कर उनके योगदान की सराहना भी की थी।
‘तेरा राज नहीं आएगा रे’ : संघर्ष और सच्चाई का दस्तावेज

मुख्यमंत्री ने पुस्तक के लेखक राजीव रंजन प्रसाद और सह-लेखिका रचना नायडू की सराहना करते हुए कहा कि यह पुस्तक ऐसे समय में सामने आई है जब माओवाद के अंत की दिशा में निर्णायक सफलता मिल चुकी है।
उन्होंने कहा कि समय के साथ घटनाएं और स्मृतियां धुंधली हो जाती हैं। ऐसे में यह आवश्यक है कि माओवाद के दौर, उससे हुए नुकसान और उससे मुक्ति के संघर्ष को दस्तावेजी रूप में सुरक्षित रखा जाए।
मुख्यमंत्री के अनुसार यह पुस्तक आने वाली पीढ़ियों को बताएगी कि नक्सलवाद से मुक्ति के लिए समाज, सुरक्षा बलों और आम नागरिकों ने कितने कठिन संघर्ष किए और कितने जवानों ने अपने प्राणों की आहुति दी।
“जिस उम्र में हाथों में कलम होनी थी, थमा दिए गए हथियार”
मुख्यमंत्री ने पुस्तक में किए गए शोध का उल्लेख करते हुए कहा कि लेखकों ने बस्तर के विभिन्न वर्गों, आत्मसमर्पित नक्सलियों और प्रभावित परिवारों से संवाद कर महत्वपूर्ण तथ्य जुटाए हैं।
उन्होंने बताया कि अध्ययन में शामिल लगभग 80 प्रतिशत पूर्व नक्सली अशिक्षित थे या केवल पांचवीं कक्षा तक पढ़े थे।
मुख्यमंत्री ने कहा,
“जिस उम्र में बच्चों के हाथों में किताब और कलम होनी चाहिए थी, उस उम्र में उन्हें हथियार थमा दिए गए। माओवाद ने एक पूरी पीढ़ी को शिक्षा, परिवार और सामाजिक जीवन से दूर कर दिया।”
‘बस्तर रोडमैप 2.0’ से होगा व्यापक विकास
मुख्यमंत्री ने कहा कि अब बस्तर के पुनर्निर्माण और आर्थिक विकास का समय है। राज्य सरकार ‘बस्तर रोडमैप 2.0’ के तहत योजनाबद्ध तरीके से कार्य कर रही है।
उन्होंने बताया कि:
- नियद नेल्ला नार योजना के माध्यम से दूरस्थ गांवों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाया जा रहा है।
- बस्तर मुन्ने अभियान के जरिए बच्चों और युवाओं को शिक्षा एवं विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है।
- पूर्व सुरक्षा शिविरों को अब सेवा डेरे के रूप में विकसित किया जा रहा है।
- इन केंद्रों में सरकारी सेवाएं, कौशल विकास प्रशिक्षण और उद्यमिता गतिविधियां संचालित होंगी।
तीन वर्षों में आय दोगुनी करने का लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान में बस्तर की लगभग 85 प्रतिशत आबादी की मासिक आय 15 हजार रुपये से कम है।
राज्य सरकार ने अगले तीन वर्षों में ग्रामीण और जनजातीय परिवारों की आय को दोगुना करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
इसके लिए:
- सहकारिता आधारित आर्थिक मॉडल को बढ़ावा दिया जाएगा।
- लघु वनोपजों के बेहतर उपयोग और मूल्य संवर्धन पर कार्य होगा।
- कृषि के साथ पशुपालन को प्रोत्साहित किया जाएगा।
- जनजातीय परिवारों को गाय एवं भैंस उपलब्ध कराने की योजना लागू की जाएगी।
स्वास्थ्य और शिक्षा पर विशेष फोकस
मुख्यमंत्री ने बताया कि स्वस्थ बस्तर अभियान के तहत लाखों लोगों की स्वास्थ्य जांच की जा चुकी है।
उन्होंने कहा कि नए बस्तर में कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित नहीं रहेगा।
मुख्य उपलब्धियां:
- बंद पड़े 421 स्कूलों को पुनः प्रारंभ किया गया।
- अबूझमाड़ और जगरगुंडा में एजुकेशन सिटी स्थापित करने की दिशा में कार्य जारी है।
- दूरस्थ क्षेत्रों में शिक्षा और डिजिटल सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है।
सिंचाई और कृषि को मिलेगा नया आधार
मुख्यमंत्री ने बताया कि किसानों को सिंचाई सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए इंद्रावती नदी पर देउरगांव और मटनार बैराज का निर्माण किया जा रहा है।
इन परियोजनाओं के पूर्ण होने के बाद बड़ी संख्या में किसानों को सिंचाई सुविधा मिलेगी, जिससे कृषि उत्पादन और आय दोनों में वृद्धि होगी।
पर्यटन और संस्कृति को मिलेगी वैश्विक पहचान
मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर पर्यटन की दृष्टि से देश के सबसे समृद्ध क्षेत्रों में से एक है।
उन्होंने कहा कि:
- बस्तर पंडुम
- बस्तर ओलंपिक
जैसे आयोजनों ने बस्तर की समृद्ध आदिवासी संस्कृति, परंपराओं और लोकजीवन को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाया है।
डॉ. रमन सिंह बोले – यह वर्षों की मेहनत का परिणाम
कार्यक्रम में विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने पुस्तक की सराहना करते हुए कहा कि यह कृति वर्षों के शोध, अध्ययन और मैदानी अनुभवों का परिणाम है।
उन्होंने कहा कि पुस्तक किसी वातानुकूलित कमरे में बैठकर नहीं लिखी गई, बल्कि बस्तर के जंगलों तक पहुंचकर, आत्मसमर्पित नक्सलियों और स्थानीय लोगों से बातचीत कर तैयार की गई है।
विजय शर्मा का बयान : “माओवाद पेट से नहीं, दिमाग से आया था”
उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि माओवाद आर्थिक आवश्यकता नहीं बल्कि एक वैचारिक आंदोलन के रूप में आया था, जिसका उद्देश्य बंदूक के बल पर सत्ता स्थापित करना था।
उन्होंने कहा कि आज वे बंदूकें वापस रखवाई जा चुकी हैं और समाज सामान्य जीवन की ओर लौट रहा है।
श्री शर्मा ने कहा कि नक्सलवाद के समाप्त होने के बाद:
- गांवों में मेले-मड़इयों की रौनक लौट आई है।
- साप्ताहिक बाजार फिर से सक्रिय हो गए हैं।
- देवगुड़ियों में पूजा-पाठ पुनः प्रारंभ हो गया है।
- आत्मसमर्पित नक्सलियों के पुनर्वास के लिए विशेष केंद्र स्थापित किए गए हैं।
भारत36 नेशनल निष्कर्ष
‘तेरा राज नहीं आएगा रे’ केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि बस्तर के संघर्ष, पीड़ा, बदलाव और पुनर्निर्माण की यात्रा का दस्तावेज है। नक्सलवाद से प्रभावित क्षेत्र अब विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सांस्कृतिक पुनर्जागरण की दिशा में आगे बढ़ रहा है। राज्य सरकार द्वारा घोषित योजनाएं और विकास रोडमैप यदि प्रभावी रूप से लागू होते हैं, तो आने वाले वर्षों में बस्तर देश के सबसे विकसित आदिवासी क्षेत्रों में अपनी पहचान स्थापित कर सकता है।

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