गौरेला-पेंड्रा-मरवाही का विष्णुभोग चावल बना जिले की नई पहचान, मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने की मुक्तकंठ से सराहना

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स्व-सहायता समूहों की मेहनत, किसानों की परंपरा और प्रशासन की पहल से ‘विष्णुभोग’ बन रहा आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मजबूत ब्रांड

रायपुर/गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, 6 जुलाई 2026 | भारत36नेशनल

छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (जीपीएम) जिले का पारंपरिक विष्णुभोग चावल अब केवल एक कृषि उत्पाद नहीं, बल्कि जिले की नई पहचान बनकर उभर रहा है। अपनी प्राकृतिक सुगंध, बेहतरीन गुणवत्ता और पारंपरिक स्वाद के लिए प्रसिद्ध यह चावल अब महिला स्व-सहायता समूहों की मेहनत और प्रशासन की योजनाबद्ध पहल के कारण प्रदेश से बाहर भी अपनी अलग पहचान बना रहा है।

जिले के प्रवास पर पहुंचे कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार तथा अनुसूचित जाति विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब का स्वागत कलेक्टर डॉ. संतोष कुमार देवांगन ने जिले के प्रसिद्ध विष्णुभोग चावल का पैकेट भेंट कर किया। यह सम्मान केवल एक स्थानीय उत्पाद का नहीं था, बल्कि जिले की समृद्ध कृषि परंपरा, ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण और आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था का प्रतीक भी बना।

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बिहान योजना से महिलाओं को मिला आत्मनिर्भरता का नया आधार

इस अवसर पर कलेक्टर डॉ. संतोष कुमार देवांगन ने मंत्री को जानकारी दी कि राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के अंतर्गत जिले की महिला स्व-सहायता समूह विष्णुभोग चावल के उत्पादन से लेकर उसकी प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और विपणन तक की पूरी जिम्मेदारी निभा रही हैं।

महिलाओं की इस पहल से न केवल उन्हें नियमित आय का स्थायी स्रोत मिला है, बल्कि स्थानीय किसानों को भी उनके उत्पाद का बेहतर बाजार उपलब्ध हो रहा है। इससे जिले की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने के साथ-साथ पारंपरिक कृषि को भी नया जीवन मिला है।

“स्थानीय उत्पाद ही क्षेत्र की सबसे बड़ी पहचान” – गुरु खुशवंत साहेब

मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने विष्णुभोग चावल की सराहना करते हुए कहा कि गौरेला-पेंड्रा-मरवाही का यह उत्पाद जिले की समृद्ध कृषि संस्कृति और महिला स्व-सहायता समूहों की लगन का उत्कृष्ट उदाहरण है।

उन्होंने कहा कि स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देना केवल आर्थिक गतिविधि नहीं, बल्कि किसी क्षेत्र की सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने का प्रभावी माध्यम भी है। यदि ऐसे उत्पादों की बेहतर ब्रांडिंग, गुणवत्ता संवर्धन और व्यापक बाजार उपलब्ध कराया जाए तो किसानों और महिला समूहों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।

मंत्री ने इस दिशा में निरंतर प्रयास करने पर बल देते हुए कहा कि राज्य सरकार स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है।

हरिभूमि एवं आईएनएच के प्रधान संपादक का भी हुआ सम्मान

कार्यक्रम के दौरान कलेक्टर डॉ. संतोष कुमार देवांगन ने हरिभूमि एवं आईएनएच के प्रधान संपादक डॉ. हिमांशु द्विवेदी को भी विष्णुभोग चावल का पैकेट भेंट कर सम्मानित किया। इस दौरान उन्होंने जिले की विशिष्ट कृषि उपज, महिला स्व-सहायता समूहों की आजीविका गतिविधियों और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए प्रशासन द्वारा किए जा रहे प्रयासों की विस्तार से जानकारी साझा की।

किसानों, महिलाओं और प्रशासन के समन्वय का सफल मॉडल

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही में विष्णुभोग चावल को नई पहचान दिलाने की यह पहल किसानों, महिला स्व-सहायता समूहों और जिला प्रशासन के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है। यह मॉडल न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रहा है, बल्कि महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाते हुए जिले की पारंपरिक कृषि विरासत को भी नई पहचान दिला रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि विष्णुभोग चावल की ब्रांडिंग, आधुनिक पैकेजिंग और राष्ट्रीय बाजार तक पहुंच को और मजबूत किया जाए, तो यह आने वाले समय में छत्तीसगढ़ के प्रमुख कृषि ब्रांडों में अपनी जगह बना सकता है।

भारत36नेशनल की नजर:
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही का विष्णुभोग चावल यह साबित करता है कि स्थानीय संसाधनों, पारंपरिक खेती और महिला सशक्तिकरण के समन्वय से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी जा सकती है। यह पहल ‘वोकल फॉर लोकल’ और आत्मनिर्भर भारत की अवधारणा को जमीनी स्तर पर साकार करने का प्रेरक उदाहरण बनकर उभर रही है।

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