विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक 2025 को संयुक्त संसदीय समिति की अंतिम मंजूरी, मानसून सत्र में होगा पेश; सांसद बृजमोहन अग्रवाल बोले- उच्च शिक्षा में आएगा बड़ा बदलाव

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रायपुर/नई दिल्ली, 8 जुलाई 2026। देश की उच्च शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए “विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, 2025” को संसद की संयुक्त समिति (Joint Parliamentary Committee) ने अंतिम रूप दे दिया है। अब इस विधेयक को संसद के आगामी मानसून सत्र में पेश किया जाएगा।

रायपुर लोकसभा क्षेत्र के सांसद एवं संयुक्त समिति के सदस्य बृजमोहन अग्रवाल ने नई दिल्ली स्थित संसद परिसर में आयोजित समिति की बैठक में भाग लिया। बैठक के दौरान विधेयक के विभिन्न प्रावधानों पर विस्तृत चर्चा हुई और सदस्यों के सुझावों के आधार पर अंतिम मसौदा तैयार किया गया।

उच्च शिक्षा को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की तैयारी

सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि “विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, 2025” देश की उच्च शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक, गुणवत्तापूर्ण और रोजगारोन्मुख बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। उनका कहना है कि यह विधेयक केवल विश्वविद्यालयों में डिग्री प्रदान करने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि नवाचार (Innovation), अनुसंधान (Research), कौशल विकास (Skill Development) और उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप मानव संसाधन तैयार करने पर विशेष जोर देगा।

उन्होंने कहा कि विकसित भारत का लक्ष्य तभी हासिल किया जा सकता है जब देश के उच्च शिक्षण संस्थान वैश्विक मानकों के अनुरूप शिक्षा, शोध और तकनीकी विकास को बढ़ावा दें।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को मिलेगा मजबूत आधार

सांसद अग्रवाल के अनुसार यह विधेयक राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के विजन को प्रभावी ढंग से लागू करने में अहम भूमिका निभाएगा। इससे उच्च शिक्षा प्रणाली अधिक पारदर्शी, लचीली, व्यावहारिक और विद्यार्थियों के लिए उपयोगी बनेगी।

उन्होंने कहा कि यह कानून उच्च शिक्षा के पूरे ढांचे को पुनर्गठित करने की दिशा में काम करेगा, जिससे देश के विश्वविद्यालयों और शिक्षण संस्थानों की गुणवत्ता में सुधार होगा और उन्हें वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अनुरूप तैयार किया जा सकेगा।

समिति की बैठक में हुई विस्तृत चर्चा

नई दिल्ली में आयोजित संयुक्त संसदीय समिति की बैठक में विधेयक के सभी प्रावधानों पर बिंदुवार विचार-विमर्श किया गया। समिति ने विभिन्न सुझावों और संशोधनों पर चर्चा के बाद विधेयक को अंतिम रूप दिया। अब इसे संसद के आगामी मानसून सत्र में पेश किए जाने की तैयारी है।

क्या हो सकते हैं संभावित लाभ?

यदि यह विधेयक संसद से पारित होता है, तो इससे देश की उच्च शिक्षा व्यवस्था में कई बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं—

  • उच्च शिक्षा संस्थानों की गुणवत्ता में सुधार।
  • अनुसंधान एवं नवाचार को बढ़ावा।
  • उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप कौशल आधारित शिक्षा।
  • राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रभावी क्रियान्वयन को गति।
  • विद्यार्थियों के लिए अधिक व्यावहारिक एवं रोजगारोन्मुख शिक्षा प्रणाली।
  • भारतीय विश्वविद्यालयों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता में वृद्धि।

सांसद बृजमोहन अग्रवाल का बयान

सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि यह विधेयक विकसित भारत के निर्माण की दिशा में एक मजबूत कदम है। उन्होंने विश्वास जताया कि इसके लागू होने के बाद देश की उच्च शिक्षा व्यवस्था नई ऊंचाइयों तक पहुंचेगी और भारत वैश्विक शिक्षा क्षेत्र में अपनी मजबूत पहचान स्थापित करेगा।

नोट: यह समाचार सांसद बृजमोहन अग्रवाल द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति एवं उनके सार्वजनिक बयानों पर आधारित है। विधेयक के अंतिम प्रावधान संसद में पेश होने और पारित होने के बाद ही विधिक रूप से प्रभावी होंगे।

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