समग्र शिक्षा रायपुर को सौंपा संयुक्त ज्ञापन; ₹1,200 के पुराने मानदेय विवाद से लेकर ₹2,300 के मौजूदा दावे तक उठाए सवाल, चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता और स्थानीय प्रशिक्षकों को प्राथमिकता देने की मांग।
रायपुर, छत्तीसगढ़। छत्तीसगढ़ में शासकीय विद्यालयों की छात्राओं को आत्मरक्षा का प्रशिक्षण देने के उद्देश्य से संचालित रानी लक्ष्मीबाई आत्मरक्षा प्रशिक्षण योजना के अंतर्गत प्रशिक्षण कार्यों के आवंटन को लेकर सवाल उठने लगे हैं। राज्य के विभिन्न जिलों के योग्य, प्रमाणित एवं प्रशिक्षित आत्मरक्षा प्रशिक्षकों ने बाहरी निजी संस्थाओं की भूमिका, प्रशिक्षकों के चयन, मानदेय भुगतान और प्रशिक्षण अवधि को लेकर चिंता जताई है।
इस संबंध में समस्त जिला स्तरीय योग्य एवं प्रशिक्षित आत्मरक्षा प्रशिक्षक संघ, छत्तीसगढ़ ने राज्य परियोजना कार्यालय, समग्र शिक्षा, छत्तीसगढ़ शासन, रायपुर के संचालक को संयुक्त ज्ञापन सौंपा है। संघ ने मांग की है कि प्रशिक्षण कार्यों का आवंटन पारदर्शी और निष्पक्ष प्रक्रिया के तहत किया जाए तथा निर्धारित योग्यता पूरी करने वाले स्थानीय प्रशिक्षकों को प्राथमिकता दी जाए।
संघ ने विशेष रूप से हरियाणा के पंचकूला स्थित निजी संस्था ‘सस्रांग इंडियन मॉडर्न मार्शल आर्ट’ को लेकर पूर्व में सामने आए विवादों और वर्तमान प्रशिक्षण व्यवस्था से संबंधित दावों की जांच कराने की मांग की है।
वर्ष 2020-21 के प्रशिक्षण कार्यों पर उठाए सवाल
प्रशिक्षक संघ द्वारा सौंपे गए ज्ञापन के अनुसार, वर्ष 2020-21 के दौरान उक्त बाहरी संस्था ने छत्तीसगढ़ में आत्मरक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रम का संचालन किया था। संघ का आरोप है कि उस दौरान स्थानीय प्रशिक्षकों से लगभग ₹1,200 प्रति मानदेय के आधार पर कार्य कराया गया था, लेकिन भुगतान और कार्यप्रणाली को लेकर विवाद उत्पन्न हुए थे।
संघ ने प्रशिक्षकों के कथित शोषण, वादाखिलाफी और भुगतान संबंधी अनियमितताओं का उल्लेख करते हुए संबंधित संस्था के पुराने रिकॉर्ड की जांच कराने की मांग की है।
ज्ञापन में यह दावा भी किया गया है कि विवादों के चलते संस्था को पूर्व में ब्लैकलिस्ट किया गया था। हालांकि, संस्था को ब्लैकलिस्ट किए जाने संबंधी आदेश, उसकी वैधता और वर्तमान स्थिति की स्वतंत्र एवं आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है। इस संबंध में विभागीय अभिलेखों की जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
संघ का कहना है कि यदि किसी संस्था के विरुद्ध पहले प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की गई थी, तो उसे दोबारा प्रशिक्षण कार्य सौंपने से पहले संबंधित आदेशों और विभागीय रिकॉर्ड की समीक्षा की जानी चाहिए।
₹2,300 मानदेय और 30 दिन के प्रशिक्षण को 15 दिन में पूरा करने के दावे पर सवाल
वर्तमान प्रशिक्षण सत्र को लेकर भी संघ ने कई सवाल उठाए हैं। ज्ञापन के अनुसार, संबंधित संस्था द्वारा प्रशिक्षकों की भर्ती और प्रशिक्षण कार्य मिलने को लेकर दावे किए जा रहे हैं। संघ ने आरोप लगाया है कि संस्था की ओर से ₹2,300 मानदेय और प्रशिक्षण अवधि से संबंधित जानकारियां प्रचारित की जा रही हैं।
संघ का दावा है कि निर्धारित 30 दिवसीय प्रशिक्षण को केवल 15 दिनों में पूरा करने की बात भी सामने आई है। उसने इन दावों की सत्यता की जांच कराने और यह स्पष्ट करने की मांग की है कि प्रशिक्षण अवधि, कार्यादेश तथा मानदेय के संबंध में विभागीय नियम क्या हैं।
ज्ञापन में कथित तौर पर अधिकारियों के साथ मिलीभगत के आधार पर प्रशिक्षण कार्य हासिल करने की बात भी कही गई है। हालांकि, यह संघ की ओर से लगाया गया आरोप है। इसकी स्वतंत्र पुष्टि के लिए संबंधित कार्यादेश, चयन प्रक्रिया, विभागीय पत्राचार और अन्य आधिकारिक दस्तावेजों की जांच जरूरी है।
संघ का तर्क है कि यदि निर्धारित प्रशिक्षण अवधि में नियमों के विपरीत कटौती की जाती है, तो छात्राओं को मिलने वाले प्रशिक्षण की गुणवत्ता और प्रभावशीलता प्रभावित हो सकती है।
स्थानीय प्रशिक्षकों को प्राथमिकता देने की मांग
छत्तीसगढ़ के प्रशिक्षक संघ ने कहा है कि राज्य के विभिन्न जिलों में मार्शल आर्ट और आत्मरक्षा प्रशिक्षण के क्षेत्र में योग्य, अनुभवी, प्रमाणित एवं प्रशिक्षित लोग उपलब्ध हैं। इसके बावजूद बाहरी निजी संस्थाओं के माध्यम से प्रशिक्षण कार्य कराए जाने की स्थिति में स्थानीय प्रशिक्षकों के रोजगार के अवसर प्रभावित होने की आशंका है।
संघ ने मांग की है कि प्रशिक्षण कार्यों के आवंटन में स्थानीय पात्र प्रशिक्षकों को उचित अवसर दिया जाए। इसके लिए जिला स्तर पर पारदर्शी चयन प्रक्रिया अपनाई जाए और सभी आवेदकों के लिए योग्यता, अनुभव, प्रमाणपत्र तथा अन्य पात्रता संबंधी शर्तें स्पष्ट रखी जाएं।
संघ के अनुसार, स्थानीय प्रशिक्षकों को अवसर देने से न केवल रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं, बल्कि स्थानीय स्तर पर उपलब्ध प्रशिक्षण संसाधनों और अनुभव का भी बेहतर उपयोग किया जा सकता है।
हालांकि, स्थानीय प्रशिक्षकों को प्राथमिकता देने के साथ-साथ चयन प्रक्रिया में निर्धारित शासकीय नियमों, पात्रता मानदंडों और प्रशिक्षण की गुणवत्ता को भी समान रूप से सुनिश्चित करना जरूरी है।
पूर्व विवादों की जांच के बाद ही हो संस्था की पात्रता पर निर्णय
संघ ने राज्य परियोजना कार्यालय से मांग की है कि ‘सस्रांग इंडियन मॉडर्न मार्शल आर्ट’, पंचकूला, हरियाणा से संबंधित पुराने अभिलेखों, शिकायतों और विभागीय कार्रवाई की जांच कराई जाए।
संघ का कहना है कि यदि संबंधित संस्था के विरुद्ध कोई वैध ब्लैकलिस्टिंग आदेश अथवा प्रतिबंधात्मक कार्रवाई प्रभावी है, तो उसके अनुरूप नियमानुसार निर्णय लिया जाना चाहिए।
इसके अतिरिक्त, किसी भी निजी संस्था को प्रशिक्षण कार्य आवंटित करने से पहले उसके पंजीयन, वैधानिक स्थिति, पूर्व अनुभव, प्रशिक्षकों की योग्यता और पिछले कार्यों के रिकॉर्ड का सत्यापन किया जाना चाहिए।
संघ ने यह भी मांग की है कि संस्था की पात्रता को लेकर किसी प्रकार की अस्पष्टता न रहे और चयन प्रक्रिया के सभी चरण निर्धारित नियमों के अनुसार पूरे किए जाएं।
छात्राओं की सुरक्षा और प्रशिक्षण की गुणवत्ता सबसे अहम
रानी लक्ष्मीबाई आत्मरक्षा प्रशिक्षण योजना का उद्देश्य छात्राओं को आत्मरक्षा के व्यावहारिक कौशल सिखाना, उनमें आत्मविश्वास विकसित करना और उन्हें संभावित जोखिमों का सामना करने के लिए सक्षम बनाना है।
ऐसे कार्यक्रम में प्रशिक्षकों की योग्यता, प्रशिक्षण की अवधि, व्यावहारिक अभ्यास, मानदेय व्यवस्था और नियमित निगरानी की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
प्रशिक्षक संघ का कहना है कि यदि प्रशिक्षण कार्यों के आवंटन या संचालन में किसी प्रकार की अनियमितता होती है, तो उसका असर योजना के उद्देश्यों पर पड़ सकता है। इसलिए विभाग को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि छात्राओं को निर्धारित अवधि के अनुसार गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण मिले और प्रशिक्षण कार्यों की नियमित समीक्षा की जाए।
संघ ने जोर दिया है कि योजना के क्रियान्वयन में किसी संस्था विशेष के हितों के बजाय छात्राओं की सुरक्षा, प्रशिक्षण की गुणवत्ता और प्रशिक्षकों के वैध अधिकारों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
राज्य स्तरीय जांच और दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग
संयुक्त ज्ञापन में संघ ने राज्य शासन और समग्र शिक्षा विभाग से प्रशिक्षण कार्यों के आवंटन की राज्य स्तरीय जांच कराने की मांग की है।
संघ चाहता है कि निम्नलिखित बिंदुओं पर स्पष्टता लाई जाए:
- प्रशिक्षण कार्य आवंटित करने की चयन प्रक्रिया और उसके निर्धारित मानदंड।
- संबंधित निजी संस्थाओं की पात्रता, पंजीयन और पूर्व कार्यों का सत्यापन।
- प्रशिक्षकों की नियुक्ति, योग्यता और मानदेय भुगतान से संबंधित नियम।
- निर्धारित प्रशिक्षण अवधि तथा वास्तविक रूप से कराए जाने वाले प्रशिक्षण का विवरण।
- पूर्व में दर्ज शिकायतों, विभागीय जांच और कथित ब्लैकलिस्टिंग से संबंधित अभिलेख।
- किसी भी कथित अनियमितता की पुष्टि होने पर जिम्मेदार पक्षों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई।
संघ ने यह भी मांग की है कि संबंधित कार्यादेश, पात्रता संबंधी शर्तें, चयन प्रक्रिया और भुगतान नियम सार्वजनिक किए जाएं, ताकि प्रक्रिया को लेकर किसी प्रकार का संदेह न रहे।
यदि जांच में किसी अधिकारी, कर्मचारी या संस्था द्वारा नियमों के उल्लंघन अथवा वित्तीय अनियमितता की पुष्टि होती है, तो संबंधित पक्षों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
अब समग्र शिक्षा विभाग के रुख पर नजर
रानी लक्ष्मीबाई आत्मरक्षा प्रशिक्षण योजना से जुड़े इस मामले में अब समग्र शिक्षा विभाग की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। प्रशिक्षक संघ द्वारा उठाए गए सवालों के संबंध में विभागीय रिकॉर्ड, संबंधित संस्था की पात्रता, प्रशिक्षण अवधि और मानदेय से जुड़े नियमों की जांच से स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
फिलहाल, संघ की ओर से लगाए गए आरोपों और मांगों के आधार पर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की आवश्यकता सामने आई है। संबंधित संस्था और विभाग का आधिकारिक पक्ष उपलब्ध होने पर उसे भी समाचार में शामिल किया जाना चाहिए, ताकि पाठकों के सामने सभी पक्षों की बात रखी जा सके।
निष्कर्ष
छत्तीसगढ़ में बालिकाओं को आत्मरक्षा प्रशिक्षण देने वाली महत्वपूर्ण योजना के क्रियान्वयन को लेकर उठे सवाल केवल स्थानीय प्रशिक्षकों के रोजगार तक सीमित नहीं हैं। यह मामला प्रशिक्षण की गुणवत्ता, सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता, संस्थाओं की पात्रता और छात्राओं को मिलने वाले वास्तविक लाभ से भी जुड़ा है।
अब देखना होगा कि समग्र शिक्षा विभाग संघ की मांगों पर क्या कदम उठाता है और प्रशिक्षण कार्यों के आवंटन से संबंधित विवादों की जांच के बाद क्या स्थिति सामने आती है।
स्थानीय योग्य प्रशिक्षकों को उचित अवसर देना, निर्धारित नियमों का पालन सुनिश्चित करना और छात्राओं को गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण उपलब्ध कराना इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए महत्वपूर्ण होगा।
Bharat36National की नजर इस मामले से जुड़े आगामी घटनाक्रम और विभागीय प्रतिक्रिया पर बनी रहेगी।
समाचार के लिए महत्वपूर्ण संपादकीय नोट
इस समाचार में ब्लैकलिस्टिंग, भुगतान विवाद, अधिकारियों के साथ कथित मिलीभगत और प्रशिक्षण अवधि से संबंधित बातें संघ के ज्ञापन में लगाए गए आरोपों के रूप में प्रस्तुत की गई हैं। प्रकाशन से पहले संबंधित संस्था और समग्र शिक्षा विभाग का पक्ष लेना, ब्लैकलिस्टिंग आदेश की पुष्टि करना तथा कार्यादेश एवं मानदेय संबंधी दस्तावेजों का सत्यापन करना उचित होगा।


📰 वर्ष 2022 से पत्रकारिता जगत में सक्रिय सोनू कुमार ने अपनी पहचान निर्भीक, निष्पक्ष और जनहित की पत्रकारिता से बनाई है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत समय घटति घटना दैनिक अख़बार से रायपुर जिला ब्यूरो चीफ के रूप में की। वर्ष 2023 में रायपुर पत्रिका दैनिक से जुड़ने के बाद
इलेक्ट्रॉनिक मीडिया VIP News मे छत्तीसगढ़ में ब्यूरो चीफ बनाए जाने पर विशेष पहचान मिली।
🎙️ प्रिंट मीडिया के साथ-साथ उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में News 21,बुलंद छत्तीसगढ़ तथा आवाम दुत में ब्युरो प्रमुख Chhattisgarh के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाईं।
📺 वर्तमान में वे “Bharat 36 National” YouTube चैनल एवं 🌐 Bharat36National.com पोर्टल के संपादक के रूप में सक्रिय हैं।
✨ पहचान — बेबाक, तेज़ और सच को जनता तक पहुँचाने वाली पत्रकारिता।



