महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े का बड़ा फैसला, केंद्रीकृत खरीद व्यवस्था खत्म
रायपुर, 24 जून 2026 | Bharat36National
छत्तीसगढ़ सरकार ने महिला एवं बाल विकास विभाग में एक बड़ा प्रशासनिक सुधार लागू करते हुए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के हित में महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने साड़ी खरीदी की वर्षों पुरानी केंद्रीकृत व्यवस्था को समाप्त कर दिया है। अब साड़ी खरीदने के लिए निर्धारित राशि सीधे आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के बैंक खातों में अंतरित की जाएगी।
राज्य सरकार का यह निर्णय मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में सुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
कार्यकर्ताओं को मिलेगी पसंद की साड़ी चुनने की स्वतंत्रता
अब तक आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के लिए साड़ियों की खरीद संचालनालय स्तर पर केंद्रीकृत प्रक्रिया के माध्यम से की जाती थी। हाल के समय में इस व्यवस्था को लेकर विभिन्न स्तरों पर सवाल उठे थे तथा कार्यकर्ताओं द्वारा कई सुझाव भी दिए गए थे।
इन सुझावों और शिकायतों का गंभीरता से परीक्षण करने के बाद विभाग ने निर्णय लिया कि साड़ी खरीदी के लिए निर्धारित राशि सीधे संबंधित कर्मचारियों के खातों में भेजी जाए। इससे कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को अपनी पसंद, सुविधा और स्थानीय उपलब्धता के अनुसार साड़ी खरीदने की स्वतंत्रता मिलेगी।
डीबीटी के माध्यम से सीधे पहुंचेगा लाभ
महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मंशा है कि शासन की प्रत्येक सहायता राशि सीधे लाभार्थी तक पहुंचे। इसी सोच के अनुरूप डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) व्यवस्था को बढ़ावा दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार लगातार तकनीक आधारित और पारदर्शी व्यवस्थाओं को लागू कर रही है। साड़ी खरीदी के लिए सीधे खाते में राशि भेजने का निर्णय भी इसी नीति का हिस्सा है।
विभागीय वेबसाइट पर उपलब्ध रहेगा ड्रेस कोड
मंत्री राजवाड़े ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के लिए निर्धारित साड़ी का मूल डिजाइन पूर्ववत रखा जाए। अंतिम डिजाइन तय करने से पहले कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं से परामर्श भी लिया जाएगा।
साड़ी का निर्धारित रंग और डिजाइन महिला एवं बाल विकास विभाग की वेबसाइट पर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे पूरे प्रदेश में एकरूपता बनी रहे।
हालांकि कपड़े के प्रकार जैसे कॉटन, सिंथेटिक या अन्य विकल्पों का चयन स्थानीय स्तर पर स्वयं कार्यकर्ता एवं सहायिकाएं कर सकेंगी।
कार्यकर्ताओं के सम्मान और अधिकार सर्वोच्च प्राथमिकता
मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि विभाग में वर्षों से संचालित व्यवस्थाओं की निरंतर समीक्षा की जा रही है। जहां भी सुधार की आवश्यकता महसूस होगी, वहां हितग्राहियों के हित में आवश्यक बदलाव किए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका बहनों के सम्मान, सुविधा, अधिकार और कल्याण के प्रति विभाग पूरी तरह संवेदनशील है तथा उनके हितों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।
प्रति यूनिफॉर्म 500 रुपये का प्रावधान
गौरतलब है कि भारत सरकार की बाल विकास सेवा योजना के तहत आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को प्रतिवर्ष दो यूनिफॉर्म प्रदान करने का प्रावधान है। इसके लिए प्रति यूनिफॉर्म अधिकतम 500 रुपये की राशि निर्धारित की गई है।
नए निर्णय के बाद यह राशि सीधे लाभार्थियों के खातों में पहुंचने से प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और प्रभावी होगी।
क्या होगा फायदा?
- साड़ी खरीदी में पारदर्शिता बढ़ेगी।
- बिचौलियों और अनावश्यक प्रक्रियाओं की भूमिका समाप्त होगी।
- कार्यकर्ताओं को अपनी पसंद की साड़ी खरीदने का अधिकार मिलेगा।
- सरकारी राशि सीधे लाभार्थियों तक पहुंचेगी।
- विभागीय जवाबदेही और सुशासन को मजबूती मिलेगी।
Bharat36National Analysis
महिला एवं बाल विकास विभाग का यह फैसला केवल एक प्रशासनिक बदलाव नहीं बल्कि लाभार्थी केंद्रित शासन व्यवस्था की ओर बढ़ाया गया एक महत्वपूर्ण कदम है। डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर आधारित यह मॉडल भविष्य में अन्य योजनाओं के लिए भी उदाहरण बन सकता है। इससे आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को अधिक सम्मान, विकल्प और सुविधा मिलने की उम्मीद है।

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